PPF Investment: सुरक्षा जरूरी, लेकिन क्या यह आपके लिए है बेहतर? जानिए पूरा सच
पीपीएफ निवेश: सुरक्षा जरूरी, लेकिन यह आपके लिए क्या है बेहतर? जानिए पूरा सच
जैसे ही नया वित्त वर्ष शुरू होता है, वैसे ही निवेश को लेकर अपने कर्मचारियों पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है। पीपीएफ जैसे निवेश विकल्प को लेकर भी लोगों के मन में संशय हो सकता है।

पीपीएफ के फायदे और नुकसान: जैसे ही नया वित्त वर्ष शुरू होता है, वैसे ही निवेश को लेकर अपने कर्मचारियों पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है। खासतौर पर पब्लिक पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) जैसे पुराने और महंगे विकल्प लेकर अब कई लोग यह सामान चाहते हैं कि शेयर टाइम में यह आज भी शानदार ही है या नहीं? आइए जानते हैं, इस विषय में…
आख़िर क्यों हैं ये लोगों की पसंद?
लंबे समय से सार्वजनिक भविष्य निधि को एक भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसका बड़ा कारण यह है कि यह सरकार द्वारा चुना गया है।
इसलिए बाजार की उठापटक का असर नहीं देखा गया। साथ ही अणुओं को फिक्स रिटर्न मिलते हैं। साथ ही यह स्काइब ईईई श्रेणी में आता है। यानी इसमें निवेश, मैच वाला इंटरेस्ट और मैच्योरिटी पर मीट वाली नकद राशि पर टैक्स नहीं लगता है। यही कारण है कि, लोग आज भी पी पी पी पर विश्वास बनाए हुए हैं।
शोरूम के ऑर्केस्ट्रेशन में सीमित रिटर्न
खैर ही पीफ पर इस समय करीब 7.1 फीसदी की दिलचस्पी मिल रही है। लेकिन तेजी से बढ़ती हुई बैंकिंग को देखते हुए अगर मीटिंग वाला रिटर्न्स बैलेंस शीट के बराबर है तो बिजनेस के लिए डेमो फंड नहीं बनता है। हालाँकि, सुरक्षित निवेश होना पीआईएफएफ को अभी भी लोकप्रिय बनाया गया है।
लॉक-इन और लिमिट से जुड़ी सुविधाएँ
कई निवेशकों के लिए सार्वजनिक भविष्य निधि में निवेश करना समय अस्थिरता एक बड़ी चुनौती बन सकता है। क्योंकि इसमें 15 साल का लंबा लॉक-इन स्थापन होता है। साथ ही तुरंत पैसा निकालना आसान नहीं होता। इसके अलावा, प्लेसमेंट निवेश की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये तय है। अधिक निवेश करने वालों के लिए यह नकद कम हो सकता है।
इसके अलावा इंटरनैशनल के बीच फ़्रांसीसी फंड और एएसपी जैसे विकल्प भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। हालाँकि, निवेश पर रिटर्न के साथ-साथ जोखिम का खतरा भी अधिक होता है।