किसानों में खुशी की लहर, रबी की फसल के लिए सरकार ने जारी किए 1082 करोड़ रुपये
रबी सीजन के लिए केंद्र सरकार ने 10 राज्यों में अचानक 1082 करोड़ रुपये की भारी-भरकम हिस्सेदारी रखी है। जानिए किस राज्य के किसानों का पैसा कितना है?

देश के करोड़ों के लिए सरकार बहुत सी योजनाएं चलाती है। अन्य ऑनलाइन फ़ायदेमंद किसानों का प्रदर्शन है। देश में रबी का सीजन लगभग शुरू हो चुका है। ऐसे में डॉक्युमेंट्स के लिए असोसिएशन की तैयारी सबसे ज्यादा जरूरी है। किसानों की इसी परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 राज्यों के बीच रबी बटालियन की कुल 1082 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फंडिंग जारी की है।
इस आर्थिक मदद के लिए राज्य से बीज, खाद और खेती से जुड़ी साज-सज्जा करना बहुत आसान होगा। आपको बता दें कि इस नए मास्टर प्लान के तहत किस राज्य का कितना हिस्सा शामिल है और रबी सीजन के बंपर निर्माण के लिए सरकार की ओर से और किन लोगों की मदद के लिए दी जा रही है पूरी खबर।
सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
केंद्रीय मंत्री ने रबी फसल के लिए 10 राज्यों के लिए 1082 करोड़ जारी किए।
सरकार ने दलहन खेती पर ज़ोर दिया, मिट्टी की प्रामाणिकता से भिन्न उपयोग की सलाह दी।
किसान क्रेडिट कार्ड-बीमा पर कार्रवाई, किसान क्रेडिट कार्ड-बीमा रिज़र्व होगा।
किन राज्यों का मिलान पोर्टफोलियो?
सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत देश के 10 चुनिंदा राज्यों को मुद्रा के मुद्रा पत्र सीधे मंच पर बेचे हैं। इस सूची में पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 290 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा हरियाणा के लिए 198 करोड़, छत्तीसगढ़ के लिए 181 करोड़ और केरल प्रदेश के लिए 154 करोड़ रुपए के विचार रखे गए हैं।
बिहार के खाते में 114 करोड़ और कर्नाटक के लिए 104 करोड़ रुपये आये हैं. वहीं जोरम को 75 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़, झारखंड को 58 करोड़ और पंजाब के किसानों को 43 करोड़ रुपये की फंडिंग तय की गई है।
दलहन की खेती पर ज़ोर अर, फूलद और मसूर जैसे दलहानीया की बंपर निर्माण
सरकार ने इस बार रबी सीजन के लिए स्मार्ट स्टाफ तैयार करने की योजना बनाई है। बार-बार किसान धान काटने के बाद खेत को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन सरकार चाहती है कि इस खाली समय का पूरा लाभ उठाया जाए। योजना यह है कि किसान सिर्फ पारंपरिक मीडियम तक ही सीमित न रहें। बल्कि खाली खेत पाए जाते हैं जिनमें तुअर, फूलद और मसूर जैसे दलहानीया की बंपर निर्माण लें। इस खेत की विशेषता शक्ति भी मजबूत है और लाभ भी तगड़ा होता है। इसके साथ ही खेत की मिट्टी की सेहत के लिए कार्ड केवल सॉइल हेल्थ देखने के लिए ही सही खाद और गुणवत्ता वाले ग्रेड की सलाह दी जा रही है।
सबसे बड़ी और काम की बात यह है कि किसानों को ठगने वाला प्लांट और बिजली पर सरकार का डंडा चलाने वाला है। जो लोग किसानों को नकली खाद, सस्ता बीज या सस्ता किसान बेचकर लूटते हैं। उन्हें अब बक्शा नहीं जाएगा. कई बार खाद्य पदार्थ के साथ जबरदस्ती कोई दूसरा सामान भी थमा देते हैं जिसे फोर्स टैगिंग कहते हैं।
अगर किसी ने ऐसा किया तो उसके खिलाफ सख्त और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, हर कागजात और पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ना और फसल बीमा का पैसा पूरी तरह से शेयरधारकों के साथ सीधे किसानों तक के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं। किसानों को कृषि सामग्री के लिए जरूरी समय बिल लेना चाहिए और किट पर कंपनी, किसान का नंबर और दस्तावेज की जानकारी की जांच करनी चाहिए।
मिट्टी की जाँच
रबी की तैयारी के साथ खेत की मिट्टी की जांच भी जोरों पर है। सॉइल हेल्थ कार्ड देखकर किसान समझ सकते हैं कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और पोषक तत्व डाला जाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा पोषक तत्व, भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं और लंबे समय तक मिट्टी की सेहत पर असर पड़ सकता है। सरकार के खेत बचाओ अभियान में प्रयुक्त खाद्य पदार्थों और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने की बात है।





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